विराट रूप
भगवान ने अर्जुन के सामने अपना विराटरूप प्रकट किया। अर्जुन ने अनेक प्रकार के आश्चर्यों से युक्त भगवान का सीमा रहित विराट स्वरूप देखा। उसने भगवान के अनेक सुख, अनेक नेत्र देखे। दिव्य वस्त्रों एवं आभूषणों से युक्त हैं भगवान। भगवान का शरीर ऐसे अद्भुत प्रकाश से आलोकित है कि मानों हजारों हजार सूर्य एक साथ उदित हो गये हो हों। अर्जुन ने भगवान के शरीर में सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड को देखा। अर्जुन ने ब्रम्हा तथा महादेव एवं समस्त ऋषियों को भगवान के शरीर में स्थित देखा। रूप इतना विशाल है कि उसका न आदि दिखाई देता है और न अंत दिखाई देता है और न ही मध्य। यह सही भी है। अनंत का आरंभ और अंत कैसे दिखाई देगा ?
God revealed his great form in front of Arjuna. Arjuna saw the limitless vast form of the Lord filled with many wonders. He saw many pleasures, many eyes of God. The Lord is adorned with divine clothes and ornaments. The Lord's body is illuminated with such wonderful light that it is as if thousands of suns have risen together. Arjuna saw the entire universe in the body of the Lord. Arjuna saw Brahma and Mahadeva and all the sages situated in the body of the Lord. The form is so vast that neither its beginning nor its end nor its middle is visible. This is correct too How would the beginning and end of infinity appear?
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धर्म का ज्ञान धन तथा काम में अनासक्त मनुष्य ही धर्म को ठीक-ठीक जान सकता है। धर्म की सबसे बड़ी कसौटी वेद है। जो धर्म के रहस्य तथा सार को जानना चाहते हैं, उनके लिए वेद परम प्रमाण हैं। अर्थात धर्म का स्वरूप व रहस्य जानने के लिए वेद ही परम प्रमाण है। Only a person who is not attached to money can know...
गरीब देश की गरीबी कोई अदृश्य या काल्पनिक नहीं थी और ना हि किसी ने उसे किताबों से निकालकर नारों की शक्ल दी थी। राजाओं के लिए तो मान्यता थी कि वे देश की गरीबी की परवाह नहीं करते थे और खुद की शहनशाही शान-शौकत और अय्याशी जनता के खर्च पर करते रहते थे। उनका तो जन्म ही महलों में रेशम की गुदडियों में और...